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शायद इसी को:.....

                
                                                         
                            कलम तू रूठती भी है तो
                                                                 
                            
मैं मना लेती हूं
और तू मान जाती है
अजीब रिश्ता है
हम दोनों का
ना तू रहती मेरे बगैर
ना मैं रहती तुम्हारे बगैर
हम दोनों एक दूजे के दिल
में रहते हैं
एक दूजे बिन तड़पते हैं
शायद इसी को इश्क कहते हैं।।
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एक महीने पहले

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