संगति का ख्याल रखना,
अच्छे-अच्छे को ले डूबती है।
शिक्षा का हाथ पकड़ना,
सद्बुद्धि का द्वार खोलती है।
स्वयं का ख्याल रखना,
खुद की जरूरत पड़ती है।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X