राम सिया की अद्भुत कहानी
पढ़के आ जाए आंख में पानी
एक दूसरे के दिल में रहते
एक-पल एक दूजे के लिए तड़पे
वचन तोड़ भी ना सके
वचन निभा भी ना सके
भगवान हो के सिया का
दुख हर भी न सके
भगवान ने भी खुद
बिरह में दिन बिताए,
पल पल खाए जा रही थी चिंताएं
व्यथा अपनी किसको बताएं
यह भोली भाली प्रजा समझ ही ना पाए
निष्कलंक सीता जी पर प्रजा ने
आरोप लगाया
निष्ठुर तरीके से की गई वन में उनकी विदाई।
बच्चों सहित वन में आश्रय पाई
अश्रुओं को आंखो में दबाई
अपनी व्यथा किसको सुनाती
राजमहलों की रानी दिन जंगल में काटी
नियति को कैसे टालती
एक-एक पल खुद को संभालती
सिया जी वहां सादगीपूर्ण जीवन
खाना, पीना, शयन सब नीचे जमीन पर की
राम जी ने भी ठाठ, बाट
राज महल के सुख त्याग
नीचे धरती पर शयन की,
त्याग के मूरत थे दोनों
एक दूसरे के जरूरत थे दोनों
दोनों की विवशता ऎसी
जीवन संघर्ष पूर्ण कटी
सिया जी ने भौतिक सुखों की
त्याग की
इधर राम जी ने भी मानसिक पीड़ा
सही।
दोनों की दास्तान ऐसी,
कलेजा फट जाए जैसे
आंखे नम हो जाए
ये प्यार भरी कहानी
आत्मिक रूहानी
राम सिया की अदभुत कहानी
महसूस करे तो भर जाएं आंखो में पानी।
यूं ही नहीं दुनियां को कहानी ये लुभाती
राम सिया की दुनिया है दीवानी।।
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