फूल पेड़ पौधे बाग,
लहलहाती फसले,
दिशाएं धरती ये आसमां,
चांद सितारे सब हंस रहे है।
पक्षियों की चहचआहट,
कानों में सुनाई दे रही है।
तालाब सागर नदियां सब
खुशी से झूम उठे है।
प्रकृति मंद मंद मुस्कान,
बिखेर रही है।
उसकी खूबसूरती मन को लुभा रही है
दिल को प्रफुल्लित करती है,
प्रकृति भी कुछ कहती है।
-ममता तिवारी
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