आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रकृति भी कुछ कहती है

                
                                                         
                            फूल पेड़ पौधे बाग,
                                                                 
                            
लहलहाती फसले,
दिशाएं धरती ये आसमां,
चांद सितारे सब हंस रहे है।
पक्षियों की चहचआहट,
कानों में सुनाई दे रही है।
तालाब सागर नदियां सब
खुशी से झूम उठे है।
प्रकृति मंद मंद मुस्कान,
बिखेर रही है।
उसकी खूबसूरती मन को लुभा रही है
दिल को प्रफुल्लित करती है,
प्रकृति भी कुछ कहती है।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर