आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

फिर भी सवाल

                
                                                         
                            सीता मां बन वनवास सहती।
                                                                 
                            
देवकी मां बन कारावास काटती।
यशोदा मां बन पालन पोषण करती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
लक्ष्मी बाई बन युद्ध करती।
कल्पना बन अंतरिक्ष विज्ञान में,
अमिट छाप छोड़ती।
पीटी उषा बन देश का नाम रौशन करती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
लक्ष्मी माता बन धन बरसाती।
सरस्वती माता बन विद्या लुटाती।
अन्नपूर्णा माता बन अन्न बरसाती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
दुर्गा माता बन बल,शक्ति बढ़ाती।
पार्वती माता बन राज महल का त्याग करती।
व्रत, त्यौहार प्यार का मिसाल बनती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
राधा जी बन प्यार लुटाती।
रुकमणी जी बन पत्नी बन जाती।
मीरा जी बन जहर पीती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
शबरी माता बन प्रतीक्षा करती।
अहिल्या माता बन पत्थर बन जाती।
कौशल्या माता वन वियोग सहती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
उर्मिला जी बन कर्तव्य निभाती।
मंदोदरी जी बन पति काअत्याचार सहती।
द्रौपदी जी बन चीरहरण का दर्द झेलती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
माता बन धरा पर ले आती।
पत्नी बन सहायिका बन जाती।
बहन बन हाथों की शोभा बढ़ाती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
बेटी बन घर की मान बढ़ाती।
कन्यादान का शुभ अवसर देती।
बहू बन घर की रौनक बढ़ाती।
"फिर भी सवाल, तुम क्या करती?
लड़की होना आसान नहीं।
इसीलिए, लड़की पूजी जाती।
नारी सवाल नहीं,नारी जबाब होती।
सिर्फ बेमिसाल नहीं,लाजवाब होती।
घर से लेकर बाहर तक संभालती।
खुद ही अपने हौसले बुलंद करती।
नारी किसी पहचान की मुहताज नहीं,
नारी होना ही,उसकी खूबसूरत पहचान होती।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर