विद्या से बड़ा धरा पर न कोई,
प्रकाश के आगे अंधेरा टिका न कभी।
विद्या का धनी पहुचाता नहीं हानी,
पूजने योग्य माता विद्या भवानी।
शिक्षा स्त्रोत रोशनी का,
दूर करता अंधेरा मन का।
मन का उपवन खिलता,
बिना मेहनत कहां मिलता।
शिक्षा के आगे झुक जाना,
नतमस्तक होकर पाना।
पढ़ने में न घबराना तुम,
केवल शिक्षा के आगे शीश नवाना तुम।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X