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नारी सबसे सबला: नारी पर कविता

                
                                                         
                            नारी को ना समझो अबला,
                                                                 
                            
दिल से है नारी सबसे सबला,
घर से लेकर बाहर तक संभालती,
नारी न्यारी है हार नहीं मानती।
मुश्किल काम को भी अंजाम देना जानती,
ठानती एकबार करके ही दिखाती,
कहने को नारी अबला कहलाती,
हृदय, दिल, दिमाग से सबसे सबला होती।
दुनिया के हर दस्तूर निभाती,
कट जाती पर कर्तव्य निभाती,
नारी की महिमा अद्भुत निराली
अपनी दया से भर देती झोली खाली।
जीवन में लाती खुशहाली,
दुनिया की भाग दौड़ में खुद को भूल जाती,
जीवनदायिनी अपना खुद का जीवन गंवाती,
खुद के बारे में सोचने का समय कहा पाती।
खुद को भूलकर सबका सपना संवारती,
खुद को हर परिस्थितियों में ढालती,
यूं ही नहीं खुदा का स्थान पाती,
हिम्मत, हौसलों में बहुत बलशाली।
नारी के बिना घर आंगन सचमुच अधूरी,
नारी स्नेह, त्याग, शक्ति और सृजन की प्रतिमूर्ति,
नारी के बिना जीवन ना सुहाती,
नारी ही घर की रौनक बढ़ाती।
-ममता तिवारी
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6 महीने पहले

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