नारी प्रेम की फुलवारी है।
नारी जीवन को प्रेम, दया और,
संवेदना से सजाती है।।
वह परिवार की धुरी है।
जो विपरीत परिस्थितियों में भी,
रिश्तों को प्रेम से जोड़ कर रखती है।।
नारी प्रेम,त्याग और शक्ति की प्रतिमूर्ति है।
जो एक फुलवारी की तरह,
परिवार, समाज को प्रेम की खुशबू से महकती है।।
वह स्नेह,कोमलता और अटूट समर्पण का आधार है।
जो जीवन के हर मोड़ पर प्रेरणा देती है।।
संवेदनशीलता और धैर्य से जीवन को संवारती है।
नारी यूं ही नहीं ईश्वर कहलाती है।।..................
-ममता तिवारी
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