दिल,दिमाग मन से नारी सबसे सबला।
नारी को भूल से भी ना समझनाअबला।।
हर परिस्थितियों में नारी ने खुद को संभाला।
जानती हर मुश्किलों से दृढ़ता से टकराना।।
पहने रहती शील,और संस्कारों की गहना।
अच्छा लगता उसे सभ्यता,मर्यादा में रहना।
उसके हौसले और जज्बे का क्या कहना।
करती डटकर हर मुश्किलों का सामना।।
हर सांचे में खुद को खूबसूरती से ढालना।
हर समस्यायों को तुरंत तरीके से सुलझाना।।
प्रेम की मूरत है, जानती तलवार भी उठाना।
आत्मसम्मान के लिए राजपाठ भी त्यागना।।
अपने गौरव, गाथा की जानती झंडा फहराना।
अपने शौर्य,तेज,ओज से दुश्मन को भी हराना।।
समाज नारी के बलिदानों को मत भुलाना।
आता है उसे नर्क जैसे घर को स्वर्ग बनाना।।
जानती बहन,बेटी मां,पत्नी सबका धर्म निभाना। प्यार के दौलत से दामन को ख़ुशी से भर देना।।
खुशियों का त्याग करके प्यार लुटाती कितना।
अपनों के सपनों के लिए अच्छा लगता जीना।।
सभी के सपनों को दिन भर सजाना संवारना।
दिन भर की भागदौड़ में खुद को ही भूलजाना।।
कभी किसी ने नारी के रूप को नहीं पहचाना।
हर वक्त नीचा दिखाने का ढूंढा जाता बहाना।।
नारी की कृपा से सारा जगत लगे सुहाना।
नारी को पड़ता है छुप-छुप के आंसू बहाना।।
नारी कभी किसी को नहीं करती बेगाना।
दो मीठे बोल में सब कड़वाहट भुलाना।।
हर रिश्ते को सच्चाई, निष्ठा से निभाना।
हर चुनौतियों को साहसपूर्ण स्वीकारना।।
उन्नत व्यवहार से घर समाज को सींचना।
आता उसे अपना अलग इतिहास लिखना।।
तिरस्कारों के घूंट को अमृत समझ पीना।
जानती हर हाल में खुशी से जीवन जीना।।
अपने प्रेम की खुशबू सर्वत्र बिखेरना।
सबको हर हाल में हंसते-हंसाते रहना।।
नारी के प्रताप से जग उजियार होता।
नारी के प्रकाश से सर्वत्र प्रकाशित होता।।
करते रहती हर वक्त भगवान से कामना।
सबके प्रति रखती मन में अच्छी भावना।।
नारी ने अपनी महानता से सबका दिल जीता।
नारी सिर्फ नारी नहीं, नारी धरती पर फरिश्ता।।
-ममता तिवारी
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