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मनोहर बाल कविता

                
                                                         
                            छोटे छोटे दो सगे भाई
                                                                 
                            
खा रहे थे मिठाई
मुन्नी दौड़ी आई
देखो मै लाई सुंदर सुंदर
तिल चिवरा की लाई
तुम लोग दो मिठाई
फिर मैं दूंगी स्वादिष्ट
लाई मेरी मां ने बहुत
शिद्दत से इसे बनाई
छोटा भाई बोला
मेरे पापा भी बाजार
से लाए हैं मिठाई
चलो एक दूसरे को
बांट कर खाते है
इसी में है भलाई
मुन्नी चल पड़ी
अपने घर मिलूंगी
फिर कल आकर
तुम लोग पढ़ो
घर जाकर
मै जा रही हूं होमवर्क
करने वरना मार पड़ेगी
स्कूल जाकर
मम्मी की डांट पड़ेगी
घर आकर
सब चले गए अपने घर
स्वादिष्ट मिठाई खाकर
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6 महीने पहले

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