चर्च गुरुद्वारा मंदिर जाती,
मां हमारे लिए मन्नत मांगती।
दानव मानव ईश्वर सबसे टकराती,
मुश्किलों में ढाल बन जाती।
देखे जमाने में चाहने वाले बहुत
मां के जैसा चाहत नहीं,
बिना मां को देखे मिलती राहत नहीं।
तोड़ देती वह सब वसूल,
खुद को भी जाती भूल।
बच्चों पर आंच आने देती नहीं,
हर वक्त दुआ मांगती चैन से कभी सोती नहीं।
चलते फिरते हमने भगवान देखें
ईश्वर भी धरती पर रहते हमने चमत्कार देखें,
भगवान के रूप में एक इंसान देखे
सबकी परवाह करते हुए हमने साक्षात देखे।
दिल हो जाता खुशहाल,
पूछ लेती जब मां हाल।
बहुत अच्छा लगता मां का संग,
भर देती जीवन में प्यार का रंग।
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