मां के साथ गजब का सुकून मिलता है,
वे बिना सुई धागे ही जख्म सिलती है।
खुदा के दरबार में सौ बार में मन्नते पूरी होती है,
मां तो एक आवाज में पूरी जन्नत वार देती है।
सारी अपनी खुशियां बच्चों के लिए त्याग देती है,
मां खुदा से भी बच्चो की खुशहाली की दुआ मांगती है।
मां अदभुत, अचंभित करने वाले करामाते करती है,
एक पल, एक दिन भी अपने लिए जीना भूल जाती है।
मां के सूरत मे अलग तरह की विचित्र ऊर्जा होती है,
उनको देखने मात्र से ही ज़माने की सारी दौलत मिल जाती है।
यूं ही नहीं कहां गया है मां के क़दमों में जहान होती है,
मां तो सच में भगवान से भी बड़ी होती है।
हर सुख दुःख में साथ खड़ी होती है,
मां बच्चों के लिए स्वर्ग की परी से भी बड़ी होती है।।
मां तो मां होती है, लब्जो में कहां बयां होती है,
कि, मां क्या होती है।।
-ममता तिवारी
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