आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मां सिल दीजिए: बाल हठ

                
                                                         
                            बंदर मामा के लिए सिल दीजिए,
                                                                 
                            
मां एक कुर्ता पजामा,
बिना कपड़े करते रहते हैं,
डाल-डाल पर ड्रामा।
नहीं सिल सकती तो,
एक जींस ही पापा जी से मंगवाना,
जैसे, हमको पकड़ के पहनाती हो,
उनको भी पहनाना।
उनके लिए भी बैग, किताब, कलम,
खिलौना सुंदर-सुंदर मंगवाना,
उनको भी मेरी तरह जबरदस्ती,
स्कूल भेजवाना।
उनके लिए भी तरह-तरह के
टिफिन में नाश्ते पैक करना,
फिनिश नहीं करते तो,
उनका भी आकर घर पर,
मेरी तरह क्लास लगाना।
हर संडे को उनको भी
मेरी तरह एक छुट्टी देना।
दिन भर डाल-डाल पर कूदने मत देना,
उनको भी कान पकड़ के होमवर्क कराना,
होमवर्क निपटाने के बाद ही खाना देना।
उनके लिए भी पापा जी से,
कुछ अच्छी-अच्छी चीज मिठाइयां मंगवाना,
दादी जी के चुटकुले उनको भी सुनवाना,
मां एक सिल दीजिए पजामा।
अच्छा नहीं उनका ठंडी, गर्मी में
बिना कपड़े पहने घूमना
मां कृपया मांगा दीजिए,
सुंदर सा कुर्ता पजामा।
वही पहन करेंगे, रोज खूबसूरत ड्रामा,
मै हूं उनका सबसे बड़ा दीवाना,
मां सिल दीजिए उनके लिए,
एक बढ़िया सा कुर्ता पजामा।।

बाल मन....……..
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर