हम बच्चे कितने नादान होते है।
घर में ही भगवान हमारे साथ होते है।
हमे नहीं उनकी पहचान होती है।
ओझल हो जाए वही चेहरे आंखो से,
आंखो से आसुओं की सैलाब बहते है।
हम बच्चे कितने नादान होते है।
साक्षात भगवान हमारे साथ होते है।
ये तब एहसास होते है,
जब वे हमारे पास नहीं होते है।
एक साथ खाते है,एक साथ पीते है,
फिर भी हम अंधो की तरह जीते है।
ईश्वर को आम इंसान मान लेते है,
ये तब खलते है जब उनके बिन एक निवाले
नहीं उतरते हैं।
हम दुनियां की भाग दौड़ में खोए रहते है,
सबसे कीमती थाती से अंजान रहते है,
लूट जाती प्यार के,खुशियों के असली चाबी
हमारे पैरों के नीचे जमीन नहीं रहते है
सच में, यह हकीकत कहां गया है।
बच्चे बहुत नादान होते है।
अपनी बहुमूल्य वास्तविक सम्पत्ति से,अंजान रहते हैं।
अगर समय रहते हम आगाह नहीं होते,
आंखो से कीमती मोती सरे आम बहते है।
मां पिता जी ही वह छांव होते है
जिनके छाएं तले हम महफूज होते है,
वे लोग ही हमारे चेहरे के नूर होते है।
हमारे असली गुरूर होते हैं
जहां हमें अदभुत शीतलता मिलती है।
मां पापा शबनम की बूंद होते हैं
और हमे न उनकी पहचान होती है।
ये बाते तब ज्यादा अखरते है,
जब हम अपनी गलती सुधार भी नहीं
सकते है, हम बहुत विवश हो जाते है,
हमारे गले, अंत में पछतावे के हार आते है,
जो हमे पल पल नाग की तरह डसते है।
वक्त रहते ये बातें समझ जाने चाहिए,
मां बाप के क़दमों में जहान होती है,
उनके ही दम पर सारे पूरे हमारे अरमान होते है।
उनके बदौलत ही चैन से सोते हैं।
उनके बिना हम बेहिसाब रोते हैं,
सुकून, चैन मां पापा ही होते हैं।
वे हमारे साथ होते हैं, और हम अंजान रहते हैं,
हम कितने भारी गुनाह करते है,
खुद को नहीं माफ़ कर पाते हैं
मां पापा तो ईश्वर के रूप में आते हैं,
हम नादान बच्चे पहचानने में चूक कर जाते हैं।
हम बाद में क्या कर सकते है,
वे लोग बहुत याद आते हैं,
हम अश्कों के बेहतरीन कीमती मोती
बहाकर, यादों के दरिया में डूब जाते हैं।
हम बच्चे बहुत नादान होते है,
मूल्यवान हीरे कोयले के भाव तौल देते हैं।।
विशेष अगले पेज पर………..
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X