मां के बिना भी जिंदगी मुकम्मल होती होगी
मां के आंचल के जैसा कोई रजाई होती होगी
मां के जैसी किसी की आंखें रोती होगी
मां किसी को बिना खिलाए खाती होगी
मां जितनी दुआएं दुनिया देती ही होगी
मां के जैसी दुनिया कम सोती होगी
मां किसी भगवान से कम होती होगी
मां की मोहब्बत इबादत से कम होती होगी
मां की सांसे बिना बच्चों को देखे चलती होगी
मां जैसी दुनिया धड़कनों में अपने बसाती होगी
मां जैसा जख्म दुनिया मुस्कान से हरती होगी।।
-ममता तिवारी
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