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मां हमारी खुशियों की चाबी

                
                                                         
                            देती हमें पढ़ने की आजादी,
                                                                 
                            
हर गमों से हमें बचाती
ज्ञान की बातें बताती,
मां हमारी खुशियों की चाबी।

उन्नत जीवन जीना हमें सिखाती
सारे कर्तव्य बखूबी निभाती,
बेहतर से बेहतरीन सौगाते देती
उनके दम पर खुशी से दिन और रातें कटती।

संस्कार युक्त जीवन मानव का पहला धर्म,
मेहनत से करना कर्म मन में होगा हर्ष।

दुखियों के लिए रखना मर्म,
देखना जब आंखें नम।

मां बहुत निराली व्यंजन बनाती भांति भांति,
मन में हमेशा भजन और गीत गुनगुनाती।

मन हर लेती उनकी मनोहर छवि,
रहती हमेशा हृदय में बसी।

सुना, ऊपर भगवान है
नीचे तो हमने देखे मां है
ईश्वर कई रूप में आते,
मां के रूप में खूब भाते।

सच्चाई की हमें पाठ पढ़ाती,
मां हमारी खुशियों की चाबी।
- ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

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