आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

लिखती हूँ:......उजाले के लिए

                
                                                         
                            मन का अंधेरा
                                                                 
                            
मिटाने के लिए
तन्हाई से निजात पाने के लिए
सुकून मन को दिलाने के लिए
उदासी से जंग करने के लिए
मन में उमंग भरने के लिए
लिखती हूँ...................
मन को मज़बूत करने के लिए
दिल को दुरुस्त रखने के लिए
ना कुछ पाने के लिए
ना मशहूर होने के लिए
बस,मन की मायूसी हटाने के लिए
लिखती हूँ मैं.......................
अपने मन को नेक काम में लगाने के लिए
शब्दों के दौलत से मन का कोना भरने के लिए
खुद के साथ-साथ दूसरों को भी खुशी देने के लिए
लिखती हूँ..........................
मन के उजाले के लिए
तिमिर मिटाने के लिए
नव युग के उजियारे के लिए…।।
-ममता तिवारी
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर