किताबों में अगर झुक जाए सर,
कहीं और झुकाना नहीं पड़ता।
ये पहचान बना दे, कहीं नाम
बताना नहीं पड़ता।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X