मेरे दिल की आवाज सुनती है
मुझसे बेहद मोहब्बत करती है
मैं उसकी भाषा समझती हूं
वह खिल उठती है
किताबें मेरी तरफ देखती है
इसकी गुफ्तगू सारे जहां से निराली
भर देती जीवन में खुशहाली
होने नहीं देती कभी निराश और खाली
तन्हाई की सबसे बड़ी हमदर्द और साथी
सारे ज़ख्म दर्द गम को चुटकी में हर लेती है
पता नहीं कहां से इतनी इल्म और तरकीबे सीखी है पढ़ने से मन भरता नहीं
इसका साथ खूब भाता है
दिल को लुभाती है
हमेशा करीब बुलाती है
राज दिल खोलती है
खुशियों से मन भर देती है
किताबें मेरी तरफ देखती है
- ममता तिवारी
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