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किसी भी रूप में

                
                                                         
                            भरोसा करना ही है,
                                                                 
                            
तो मेहनत और ईश्वर पर करो।
यकीन न हो,
वह भी काम हो जाता है।
खुद पर और ईश्वर पर,
विश्वास ईश्वर को भी भाता है।
जो हम असंभव मानते हैं,
वह काम भी अकस्मात हो जाता है
क्योंकि ईश्वर का भी योगदान मिल जाता है।
कर्म ही इंसान का धर्म है,
ईश्वर उसे सफल बनाते हैं
किसी भी रूप में कर्म का फल जरूर देते हैं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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