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खुले गगन में उड़ना चाहूं:......

                
                                                         
                            खुले गगन में उड़ना चाहूं
                                                                 
                            
मुझको उड़ने दो
फूलों की तरह खिलना चाहूं
मुझको खिलने दो

मन की अनुभूतियों को
शक्ति देना चाहूं
हाथ में कलम दो
पत्थर पर भी उगना चाहूं
मुझको तुम हौसला दो

दीप बन उजाला करना चाहूं
मुझको दीप बन जलने दो
सर्वत्र उजियारा करूँ
दिवाकर की तरह निकलने दो

सबके कष्ट हर सकूं
सुंदर मरहम बनने दो
ऊंचा अपना नाम करूं
मुझको कुछ करने दो

हर तरफ खुशबू बिखेरूँ
मुझको सुमन बनने दो
सबको मैं शीतल करूँ
मुझको पवन बन बहने दो

बाधाओं से मैं ना डरूं
मुझको निडर,निर्भीक बनने दो
सबके लिए हौसला बनूं
मेरे हौसलों को मज़बूत होने दो

सबके चेहरे पर हँसी ले आऊं
मुझको मुस्कान बनने दो
सबके जीवन में खुशियां ले आऊं
ख़ुशी की खान बनने दो।।

-ममता तिवारी
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2 घंटे पहले

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