साहस मन में भरती हो,
खुद पर गुमान नहीं करती हो।
सबसे प्यार करती हो,
सबका उत्साह बढ़ाती हो,
सबके जीवन में प्रकाश करती हो,
कविता तुम, जादू की छड़ी हो।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X