कठिन राह चल कर ही कर्मयोगी निखरते,
आसान राह तो आलसियो के बसेरे।
आलसी जल्दी उठ पाता नहीं,
कर्तव्य अपना भली भांति निभाता नहीं
कर्मयोगी कर्म करते अपना भाग्य स्वयं गढ़ते।
धूल को भी फूल मानकर दिल से उसका स्वागत करते,
तभी तो लाख विघ्नों के बावजूद सफलता का हार पहनते।
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