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कही दूर ले चलो:...….

                
                                                         
                            "ए किताब"
                                                                 
                            
तुम्हारा हाथ पकड़ी हूं
ले चलो कहीं दूर
जहां केवल मैं रहूं तुम रहो
ना वहां कोई उलझन हो
ना कोई शोर
सिर्फ रात हो भोर हो
और तुम्हारा साथ हो
तुम भी खामोश रहो
मैं भी खामोश रहूं
सिर्फ और सिर्फ
इशारों-इशारों में बात हो
मैं पढ़कर तुमको
तुममें खो जाऊं
तुम मेरी दिल की धड़कन सुनो
मैं भूल जाऊं दुनिया को
सिर्फ तुमको चुनूं
तुम मेरे जीवन में प्रकाश भरो
"ए किताब"
मैं तुम्हें दिलों जान से चाहती हूं
तुम मेरा दिल ना तोड़ो
तुम्हें देखकर जीती हूं
तुम्हें देखकर हंसती हूं
तुम्हें देखकर खाती हूं
तुम्हें देखकर पीती हूं
मुझे कभी तन्हा न छोड़ो
तुम मेरे आत्मा में बसी हो
मेरी अंतरात्मा की आवाज सुनो
"ए किताब"
तुम शांत,खामोश रहती हो
मुझे भी अपनी तरह खामोश कर दो
मेरा जीवन सफल कर दो
मेरे दामन में खुशियां भर दो
मुझे भी शोर से दूर कर दो
मुझे कही दूर ले चलो
मुझ पर एक एहसान कर दो
मेरे जीवन में खुशी के रंग भर दो
तुम्हारा हाथ पकड़ी हूं
ले चलो कही दूर
जहां मैं तुम्हारी सुनूं
तुम मेरी सुनो
मेरे मन में खुशी के फूल खिला दो
कही दूर ले चलो
कही दूर ले चलो।।
-ममता तिवारी
 
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2 महीने पहले

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