ये फलक ये चांद ये सितारे ये बहारे,
कुछ भी नहीं मां आपके आगे
आंखों की नूर आप मेरी गुरुर आप
आपकी आंखों से मैं दुनिया देखी
मेरी आंखों की प्रकाश आप
मेरे आंखों में आपका बसेरा
कहां मुझे आपके सिवा कुछ दिखता
जो आपकी आंचल में सुख मिला
वह कहां किसी दुकान में बिकता
जब मैं आंखें खोली आपकी दीदार ने मुझे चका चौंध
कर दिया
मैंने आपकी प्रेम की अनुभूति को हृदय में बसा लिया
मां आपके जैसा कहां कोई मिला
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X