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कागज़ को दीया बना:.....कलम को बाती बना

                
                                                         
                            शब्दों की चमक से
                                                                 
                            
जगमग हो जहाँ
क्योंकि शब्द हैं साक्षात
सूर्य भगवान के समान....

कागज़ को दीया बना
कलम को बाती बना
अंधेरा हर लूं धरा का
दिल में यही अरमान....

शब्दों की रोशनी से
उज्जवल हो जहां
क्योंकि शब्द हैं
अंधेरे में जलते
उजाला बिखेरते
दीपक के समान....

दिल में खुशी के दीप जले
धरा से अंधेरा टले
कलम उठाना सार्थक हो
जब सबके चेहरे पर
ख़ुशी के फूल खिले…...

शब्दों के आलोक से
आलोकित हो यह धरा
क्योंकि शब्द हैं
भास्कर के समान.....
-ममता तिवारी
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53 मिनट पहले

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