जो भी सीखें उन्हीं से सीखे,
हम पर हैं उपकार उन्हीं के
देख लिया पूरी दुनिया घूम के,
जहां भी देखू माँ ही दिखे।
सोने पर स्वप्न में दिखे,
जागने पर घर आंगन में दिखे
मन मंदिर में दिखे,
जहां भी देखू मां ही दिखे।
सिखाए उन्होंने बहुत सलीके,
आदर करना जीवन में सभी के।
खुद को कभी मायूस न करना,
गलत राह पर कभी न चलना।
सच्चाई की राह देखना अपना के
कांटों में भी फूल खिलेंगे,
सच के कड़वे फल भी लगते है बहुत मीठे।
मत रहना कभी अधीर होकर
इंसानियत रंग लाती है जरूर
ठोकरे बनाती है दृढ़ और मजबूत,
उड़ना ऊंची उड़ान देखकर।
किसी से कभी जंग न करना,
अपने जीवन में खुद ही रंग भरना।
जो भी सीखें उन्हीं से सीखे।।
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