आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हे मन: सहारा बन

                
                                                         
                            नित्य-नित्य जीवन के उथल-पुथल,
                                                                 
                            
से जब आतूर हो जाए प्यारा मन,
एक ही संकल्प से उसको सींचना
उठ जा तू ही है मेरा सहारा रे मन,
तू हार कर बैठेगा,
मेरा उद्धार करेगा कौन?
तेरे सहारे चलती सांसे एक एक क्षण,
तू साथ दे तो जीत लूं
दुनियां का हर रण,
तू प्रण कर साथ देगा आजीवन।
साथ कोई नहीं देता यहां,
ना कोई देगा कभी,
हे मन तू भी साथ छोड़ने का बना लेता है मन,
तेरे दम पर ही दुनिया का जीती हर जंग,
तू ही है मेरा सहारा मन,
उम्मीद तू ही, विश्वास तू ही,
जीवन पार लगा तू ही,
जब जब मैं भटकूं
सही राह दिखा तू ही,
सपना दिखा तू ही,
सपना सवार तू ही,
खुद का हौसला बढ़ा तू ही,
अंजाम तक खुद को पहुंचा तू ही,
हे मन उल्लास तू ही,
जीवन का प्रकाश तू ही,
पूरा ब्रह्मांड तू ही,
धरती और आकाश तू ही,
तू ही मेरा पूरा अरमान,
तू ही संपूर्ण आश,
तू ही है पूर्ण विश्वास
तू ही लगा नैया पार,
तू ना हो, निराश कभी,
तू जाग अभी,
खुद पर कर नाज अभी,
मत अपने को कमजोर मान,
उठा दिल में तूफान,
होठों पर सजा मुस्कान,
लिख अपना रोचक इतिहास,
हे मन होगा तू पास
रख मन में आश,
तू है चमत्कार,
बदल अपना व्यवहार,
खुद को गले लगा,
गमों को दफा कर,
खुद का साथ देना शुरू कर,
तू अपना बदल देगा मुकद्दर,
तू ले शपथ हे मन,
खुद को अपना मान
हे मन सहारा बन।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर