किसी को किसी का परवाह नहीं होता,
कहने के लिए सभी अपने,
वास्तव में कोई अपना नहीं होता।
ये फलक ये जमी गवाह है,
अश्कों को आंखों में भी जगह नहीं मिलता।
ढूंढ लो पूरी दुनिया में तुमसे अच्छा कोई
तुम्हारा हमराज नहीं होता,
टूटने के बाद भी सभी संभलते हैं
वक्त रहते कोई इंसान नहीं संभलता।
चुभते हैं जब पैरों में कांटे तो कोई
निकालने वाला भी नहीं मिलता।
आसुओं को रोकना इतना आसान नहीं होता,
बहने देते इसे बेपरवाही से
बिन बहे ,दिल को सुकून नहीं मिलता।
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