कागज की नाव की तरह हमारा अस्तित्व है
टिकता कहां किसी का हमेशा यहां व्यक्तित्व है
वर्तमान में जीना,हंसना हंसाना कर्तव्यों का सही से पालन करना ही हमारा दायित्व है
क्षणभंगुर इस जीवन में क्या किसी से बैर निभाना
जीवन में प्रेम,सहयोग बनाए रखना ही असली सार्थक जीवन है।।
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