आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हमारा अस्तित्व:.....

                
                                                         
                            कागज की नाव की तरह हमारा अस्तित्व है
                                                                 
                            
टिकता कहां किसी का हमेशा यहां व्यक्तित्व है
वर्तमान में जीना,हंसना हंसाना कर्तव्यों का सही से पालन करना ही हमारा दायित्व है
क्षणभंगुर इस जीवन में क्या किसी से बैर निभाना
जीवन में प्रेम,सहयोग बनाए रखना ही असली सार्थक जीवन है।।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर