कितनी भी बाधाएं आयें
हम नहीं कभी घबराते हैं।
हम भारत देश के बच्चे हैं।
निडरता से आगे बढ़ जाते हैं।
राहों के कंकड़ पत्थर से,
हम पीछे पांव न हटाते हैं।
धूल को भी फूल बनाकर,
अपना जीवन महकाते हैं।
हम भारत देश के बच्चे हैं।
हंसते गाते आगे बढ़ जाते हैं।
धन शोहरत से भी ज्यादा,
भारत माता को मानते हैं।
स्वच्छ और सुंदर भारत का,
सपना हम मन में सजाते हैं।
दुनिया में खुशी बांटने और,
सबको हंसने हंसाने आए हैं।
सारे जगत में न्यारे हम,
भारत के बच्चे कहलाते हैं।
धरती माता के कदमों में,
हम अपना शीश झुकाते हैं।
हम भारत माता के बच्चे हैं।
हम भारतीय कहलाते हैं।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X