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है मन यही, है प्रण यही

                
                                                         
                            है मन में यही, है प्रण यही,
                                                                 
                            
करले कुछ दुनियां के लिए सही।
सही कर्मो के पथ पर अग्रसर रहे,
चाहें राहों में हो लाख बाधाएं खड़ी।

खुद के लिए सही राह चुने
दूसरों के राहों से भी कांटे चुने,
अपने साथ साथ दूसरों के भी,
जीवन में उन्नति और ख़ुशी के
बीज बोएं।

ना खुद उदासी के चादर ओढ़े
ना दूसरों को ओढ़ने दे,
खुद सफलता की सीढ़ी चढ़े,
दूसरों को भी चढ़ने दे।
है मन यही, है प्रण यही।
-ममता तिवारी
 
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6 महीने पहले

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