आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

घर आंगन रोशन करती

                
                                                         
                            खुशी खुशी मां रिश्ते निभाती
                                                                 
                            
घर आंगन रोशन करती,
क्या वे अपने लिए करती
सबकुछ तो बच्चो के लिए करती।

रात रात भर जागती,
भर भर के मन्नते मांगती
खुद की फिक्र कहा करती,
सबकुछ तो अपनों के लिए करती।

देखा नहीं मां के जैसा
यकीन नहीं होता,
इतना कोई प्यार करता
जितनी मां प्यार करती।

ख़ुशी खुशी सब रिश्ते निभाती
सबको खुश देख ख़ूब हर्षाती,
जख्मोंको हसी से तुरंत हरलेती
मां कहें या कहें साक्षात देवी।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर