खुशी खुशी मां रिश्ते निभाती
घर आंगन रोशन करती,
क्या वे अपने लिए करती
सबकुछ तो बच्चो के लिए करती।
रात रात भर जागती,
भर भर के मन्नते मांगती
खुद की फिक्र कहा करती,
सबकुछ तो अपनों के लिए करती।
देखा नहीं मां के जैसा
यकीन नहीं होता,
इतना कोई प्यार करता
जितनी मां प्यार करती।
ख़ुशी खुशी सब रिश्ते निभाती
सबको खुश देख ख़ूब हर्षाती,
जख्मोंको हसी से तुरंत हरलेती
मां कहें या कहें साक्षात देवी।।
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