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ईश्वर सर्वत्र:.....

                
                                                         
                            ईश्वर सर्वत्र व्याप्त हैं
                                                                 
                            
ईश्वर की महिमा अपरंपार है
हर कण-कण में बसते हैं
जन-जन का उद्धार करते हैं

हर क्षण निगरानी रखते हैं
सुबह के उजाले रात के अंधेरे
सब उनके प्रताप से हम देखते हैं

सच्चाई और अच्छाई के
पथ पर चलकर ही
हम ईश्वर तक पहुंच सकते हैं।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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