ज्ञान का कोई मूल्य नहीं,
यह अनमोल है।
सब धन विरासत में भी मिल जाता,
लेकिन विद्या धन मेहनत से ही संभव है।
जिसको विद्या रूपी धन चाहिए,
उसको अथक मेहनत करनी पड़ेगी।
ज्ञान धन परिश्रम से मिलता,
हाथ पर हाथ रखने से कुछ ना होता।
एक चिंगारी लगन की,
मन में जलानी पड़ेगी,
चाहिए अगर विद्या धन तो,
धुंआ तरह ऊपर उड़ना होगा।
मुश्किलों को करके शर्मिंदा,
जीत हासिल करनी होगी
मन हटाए मंजिल से तो,
मन से भी जंग करनी होगी।
लक्ष्य एक निश्चित करके,
आगे ही आगे बढ़ना होगा,
लाख मुश्किल आए,
धीर की तरफ बढ़ना होगा।
मन के भयंकर तूफानों से,
जीत कर निकलना हाेगा।
हठ करेगा मन, लेकिन इसको फटकार के,
सफलता की सीढ़ी चढ़नी होगी।
दुनिया से नहीं एक लड़ाई खुद से लड़नी होगी।
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