शाखों से टूटे पत्ते फिर शाखों पर कहां जाते हैं
एक बार जो उतर जाए दिल से
वह फिर दिल में जगह कहां पाते है
संभल कर चलना भी जरूरी है राहों के कांटो से
निकलना भी जरूरी है अतीत के चुभी हालातों से
दर्दे दिल देके लोग हाल नहीं पूछते
तुम रहोगे बेचैन वे लगाव नहीं रखते
तन्हा ही आयें तन्हा ही जाना है
खुद का ही सहारा मिलता यहां है
बात जितनी जल्दी हम समझ ले
होता हमारा ही उपकार और भला है
साथ कोई देगा ये ख्वाब ही हो सकता है
अंधेरे में खुद का परछाईं भी साथ छोड़ देता है
गैरों का सहारा मिल ही जाएगा राहों में
अपनों को पग पग पर बदलते देखा है
कहने के लिए सब कहेंगे आपकी
फिक्र ज्यादा है आजमाकर देखो यहां
निभाता कौन वादा है दिलासे के लिए
यह लब्ज बहुत अच्छा है लेकिन दूर से
सब कहेंगे आपकी फिक्र बहुत ज्यादा है
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