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मन के आंगन में सुकून का फूल खिल रहा है

                
                                                         
                            एहसास की बारिश में भीगने को मन कर रहा है
                                                                 
                            
पन्नों को स्याही से भिगोने को मन कर रहा है

कोरे कागज को रंगीन बनाने को मन कर रहा है
यादों की गहराई में उतरने को मन कर रहा है

कुछ नई यादों को बुनने को बहुत मन कर रहा है
कुछ पुरानी बातों को भूलने को मन कर रहा है

शब्दों के अनमोल मोती चुनने को मन कर रहा है
अल्फाजों को दिल से सजाने को मन कर रहा है

सजाने के बाद भी सजाने को मन कर रहा है
भीगने के बाद भी भीगने को मन कर रहा है

मन का मौसम कुछ इस कदर बदल रहा है
सारा जहां रंगीन और खूबसूरत लग रहा है

दिल की धड़कन को कुछ आभास हो रहा है
मेरे अंधियारे अशांत मन में प्रकाश हो रहा है

मन के आंगन में सुकून का फूल खिल रहा है
अंतर्मन में खुशी के अनगिनत दीप जल रहे हैं।।
-ममता तिवारी
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5 घंटे पहले

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