डूबती हुई ख्वाबों की ये कश्ती उठते हुए प्रश्नों के भंवर
हर पल हर कदम पे क्यों मुझे डरा कर गिरा रहे हैं
खामोशी के दामन तले क्यों मुझे ये छिपा रहे है
गिरती हुई सांसों की ये डोरिया क्यों मुझे डगमगा रही है
किस्मत के दरवाजे कभी नहीं खुलने के क्यों गीत गा रहे
मै कहूं तो क्या सोचूं भी क्या दिल ही तो रुला रहा है
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