आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दर्दे दिल की खबर:.......

                
                                                         
                            फूलों से जख्म खाए, तब पता चला
                                                                 
                            
कांटे तो यूं ही बदनाम थे.............।

रूह तक को छलनी करने की अदा फूलों में ही है
कांटों को तो रूह तक की पता मालूम ही नहीं..।

कांटों के ज़ख्म तो वक्त के साथ भर ही जाते हैं
रूह के लिए कोई मरहम आज तक बने ही नहीं।

कांटे तो नाम से ही बदनाम हैं वरना,
ज़ख्म फूलों के चुभन में भी कम नहीं।

दर्दे दिल की खबर रखता भी है फूल,
हर वक्त पूछता है आंखे नम तो नहीं।।
-ममता तिवारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर