फूलों से जख्म खाए, तब पता चला
कांटे तो यूं ही बदनाम थे.............।
रूह तक को छलनी करने की अदा फूलों में ही है
कांटों को तो रूह तक की पता मालूम ही नहीं..।
कांटों के ज़ख्म तो वक्त के साथ भर ही जाते हैं
रूह के लिए कोई मरहम आज तक बने ही नहीं।
कांटे तो नाम से ही बदनाम हैं वरना,
ज़ख्म फूलों के चुभन में भी कम नहीं।
दर्दे दिल की खबर रखता भी है फूल,
हर वक्त पूछता है आंखे नम तो नहीं।।
-ममता तिवारी
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