बीते लम्हों की यादें बहुत तड़पाती हैं।
हंसती हुई आंखों को नम कर जाती हैं।।
यादें कब किसी के रोके रुक पाती हैं
पल-पल आकर जीना मुहाल कर जाती हैं।।
भूलने की कोशिश,इसे और हवा दे जाती है
जितना कोशिश करो उतनी याद आती है।।
अपनों को भूलना इतना आसान नहीं होता।
बिना यादों के दीप जलाए कभी शाम नहीं होती।
सुबह-शाम रात-दिन यादें साथ निभाती हैं।
एक एहसास बन रूह में उतर आती हैं।।
बचपन की यादें जिंदगी की धरोहर बन जाती हैं।
सुहाने बचपन के दिन सच में बहुत याद आते हैं।
-ममता तिवारी
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