बिना पढ़े नहीं गुंजाइश,
कर लो मन लगाकर पढ़ाई
बीता वक्त कभी नहीं आता,
यही जीवन का फलसफा।
हमारी तुम से यही सिफारिश।
विद्या से नैतिक ज्ञान होगा,
उज्जवल घर संसार होगा।
जीवन आसान होगा,
मुट्ठी में आसमान होगा।
अच्छे बुरे का परख होगा,
अच्छे-अच्छे का संगत होगा।
जीवन में रंगत होगा
तुम्हारा मंगल ही मंगल होगा।
तुम अगर पढ़ोगे,
ऊंचाई की सीढ़ी चढ़ोगे
अपना तुम कल्याण करोगे,
दूसरों का दुख हरोगे।
तुम्हारी अलग पहचान होगी,
माता-पिता को खुशी अपार होगी।
बिना पढ़े नहीं गुंजाइश,
पढ़ने में ही सबकी भलाई।
हमारी तुमसे यही सिफारिश।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X