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भागती हुई

                
                                                         
                            भागती फिर रही हूं खुद के जज्बातों से
                                                                 
                            
डरती जा रही हूं प्यार भरी उनकी नजरों से
सिमटती जा रही हूं खुद के कशमक़श में
उलझती हुई सी चल रही हूं अपने ही विचारो में
कब क्या पता क्या होगा भावनाओं का मेरे
समझ के भी अंजान बन रही हूं मै अपनी भावनाओं से
अच्छाइयों के दामन में ख़ुद को मै बांध कर आज
मै खुद ही खुद को तड़पने की सजा दे रही हूं
खटकती फिर रही हूं मै अब अपने ही नजरों में
पिछड़ती हुई जा रही हूं मै अपने ही मंजिलों से
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9 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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