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बेटियों को उड़ने दो: कविता

                
                                                         
                            घर की मुस्कान है बेटियां
                                                                 
                            
सुकून और जान है बेटियां
पूरा जहान है बेटियां
मत पूछो? क्या है बेटियां
माता पिता के सर की ताज बेटियां
पूरे समाज की नाज बेटियां
हंसी की राज है बेटियां
हर्ष और उल्लास है बेटियां
व्रत और त्योहार है बेटियां
खूबसूरत आगाज है बेटियां
ईश्वर की अद्भुत चमत्कार है बेटियां
धड़कन और आत्मा है बेटियां
खूबसूरत आज और कल है बेटियां
उन्नत जीवन है बेटियां
सपनों की उड़ान है बेटियां
उज्जवल घर संसार है बेटियां
धरती पर सबसे खास बेटियां
मां बाप के हृदय के पास बेटियां
हंसती तो रौनक आ जाए
बातों से हृदय में कमल खिलाएं
रोते हुए को भी हंसाए
सूने घर आंगन झिलमिलाए
खुदा की इनायत है बेटियां
मानो तो इबादत है बेटियां
मत डालो उसके पांव में बेड़ियां
उड़ने दो आसमान में बनके चिड़िया
पहले आसमान की ऊंचाई देखें
फिर आकर घर में रोटी सेंके
पंखों को उड़ान देना सीखे
आसमान में निर्भीक उड़ना सीखे
मत लगाना उस पर बंदीशे
केवल देना उसे अपनी आशिषे
करना उस पर बहुत भरोसे
रहे ना कोई बेटियों से रंजिशे
ऊंची से ऊंची उड़ान भरेगी
नाम मां-बाप का रोशन करेगी
हिम्मत होगी उसकी दोस्त सहेली
खुद लिखेगी अपनी कहानी
बेटियां होती बहुत रूहानी
गढ़ देती इतिहास जुबानी।।
-ममता तिवारी
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5 महीने पहले

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