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बेबसी

                
                                                         
                            बेबसी से भरी हुई ये बूढ़ी आंखे
                                                                 
                            
मजबूरियो के बहते हुए उदास आंसू
कंपकंपाते हुए ये कमजोर हाथ
किसी अपने के सहारे की उम्मीद करते हैं
दिल मेरा ये देखकर रोता है काश मैं
इनके लिए कुछ कर पाती
इनके उदास चेहरे पे एक छोटी मुस्कान ला पाती
कोशिश है इन्हें खुशियों से रूबरू कराने की
उनके अंदर के डर को दूर कर एक ऐसा घर बनाने की
जिधर वो बेझिझक अपने ख्वाहिशों को बता सके
हे ईश्वर मुझे माफ करना इनके अंदर मै तुझे खोजती फिर रही हूं
इनको मुस्कराते देख मै खुद का जीवन धन्य समझती हूँ
कर कृपा ऐसी मै अपने मंजिल को पा सकूं
इनके मायूस लबों पे मै एक खुशियों की चमक ला सकूं
इनके अपनो को इनकी कीमत अहसास करा सकूं
उनको उनकी कमियों को दिखा सकूं
काश वो समझ सके अपनी गलतियों को
अपने बढ़ो को अपना बना सके
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10 महीने पहले

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