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बढ़े चलो

                
                                                         
                            न रूक न थक
                                                                 
                            
धीरे ही सही,
लगातार मंजिल की ओर,
बढ़े चलो।

नित्य नित्य,
बढ़े चलो
हौसला साथ लिए चलो,
राह के कंकड़ की
परवाह किए बिन,
बढ़े चलो।

राह भी आसान होगी,
रास्तों की पहचान होगी
कोशिश से संभव होगी,
हिम्मत से
बढ़े चलो।

मुस्कुरा के बढ़े चलो,
हंसते-हंसाते बढ़े चलो
तूफानों में खड़े रहो,
अडिग होकर
बढ़े चलो।

सफलता दासी होगी
दुनिया राजी होगी
हर तरफ,
वाह वाही होगी,
धीर तुम बढ़े चलो।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

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