विद्या धन से भी महान
मानता है सारा जहान
होता नहीं उसको गुमान
जो पाए लगाकर तन मन ध्यान
उच्च सर हो जाता जग में
जब विद्या समा जाए रग रग में
मन लग जाए अध्ययन में
तब कष्ट न रहें जीवन में
सबका यही अरमान रहे
शरीर में जब तक जान रहे
विद्या के रंग में रंगने के लिए
हरवक्त हम सब तैयार रहे
आलस्य का नाम न हो
अटूट विद्या से नेह हो
मंजिल से कोई दूर न हो
सबका सपना साकार हो
उत्कृष्ट मन में आश रहे
सर्वत्र विद्या का प्रकाश रहे
हम सबको विश्वास रहे
अनुपम हमारा प्रयास रहे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X