सफर में धूप ,धूल की कितनी मेहरबानी है
तुम क्या जानो,
कोयले के खरीदार हो ,हीरे की कीमत क्या जानो।
धूप,धूल से वंचित रह जाएं वह पेड़ कहां बड़ा होताहै
सूरज को डूबकर रोज निकलना पड़ता हैं।
दीयो को रोज अंधेरों से लड़ना पड़ता हैं,
हिम्मत करना पड़ता हैं यूं ही सपने पूरे होते नहीं।
बिना कोशिश किए कुछ भी हासिल होता नहीं,
बिना सफर पूरे किए धूल भी नसीब होता नहीं।
सूरज को डूबना पड़ता चांद के निकलने के लिए,
इंसान को कर्म करना पड़ता अपने उत्थान के लिए।
अंधेरों से लड़ना पड़ता प्रकाश के लिए,
आलस्य त्यागना पड़ता विकाश के लिए।
अधर्म से लड़ना पड़ता धर्म के लिए,
साहस दिखाना पड़ता सफ़लता के लिए।
युद्ध में जाना पड़ता विजय के लिए,
सच बोलना पड़ता सच्चाई के लिए।
अच्छा बनना पड़ता अच्छाई के लिए,
सब कुछ सहना पड़ता अपनों लिए।
जागना भी पड़ता सपने पूरे करने के लिए,
हारना भी पड़ता अपनों के ख़ुशी के लिए।
सर झुकाना भी पड़ता मां बाप और ईश्वर के लिए,
एहसास मानना भी पड़ता एहसान जताने के लिए।
ठोकर खाना भी पड़ता संभलकर चलने के लिए,
हंसना भी पड़ता गम छुपाने के लिए।
मन लगाना भी पड़ता अपनों को भुलाने के लिए,
पढ़ना भी पड़ता समझ बढ़ाने के लिए।
प्यार बांटना भी पड़ता प्यार पाने के लिए,
निखरना भी पड़ता दूसरो को निखारने के लिए।
ख़ुशी से जीना भी पड़ता खुशी से मरने के लिए
याद करना भी पड़ता याद आने के लिए।
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