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अदभुत रिश्ता

                
                                                         
                            मां जैसा धरा पर अवतरित कोई हुआ नहीं,
                                                                 
                            
मां जितना प्यार कही विकसित हुआ नहीं।
मां जितना संघर्ष किसी ने कभी किया नहीं।
मां जितना सहनशक्ति किसी में होता नहीं।
मां जितना पवित्र रिस्ता जहां में मिलतानहीं
मां जितना उलझन कोई सुलझाता नहीं।
मां जितना जल्दी कोई अपनाता नहीं।
मां जितना जल्दी गले कोई लगाता नहीं।
मां जितना संस्कार कहीं मिलता नहीं।
मां जितना जल्दी कोई जख्म भरता नही।
मां जितना चैन कोई धरती पर देता नहीं।
मां जितना समझदारी कहीं मिलता नहीं।
मां जितना अतुलनीय विश्वास कोई नहीं।।
इसी लिए कहां गया,
मां के जैसा धरा पर अदभुत अटल रिश्ता नहीं।
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7 महीने पहले

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