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आसमान से:.....सुकून बनके

                
                                                         
                            "बारिश"
                                                                 
                            
आसमान से उतरती
अमृत की बूंद बनके
प्यासे ही जानते
कितना आती सुकून बनके

रिमझिम-रिमझिम
बरसती
मुरझाए पत्तों में जान डालती
हर तरफ हरियाली
पशु-पक्षियों को भी खुशहाली
जिधर देखो उधर मिश्री घुली पानी

"बारिश"
आपकी भी खूबसूरत रोमांचक कहानी है
रूहानियत एहसास मधुर और रूहानी है
आप सबके दिल की रानी हैं
किसान भाई को आपके आने का बेसब्री से इंतजार रहता
तपती धरती माता भी तृप्त हो जाती हैं

बच्चे खुशी से उछल उठते
घटा छा गई
बहार आ गई
कि मधुर ध्वनि से घर-आंगन
गूंजने लगते
एक-एक बूंद से खुशियों का गागर भरते हैं
उछल-उछल कर
खुशियों की बारिश में भींग जाते हैं

टिप-टिप बरसता देख
बच्चों को हंसता खेलता देख
खेत-खलिहान मुस्कुराता देख
बड़े सयाने के मन में भी
गुलाब खिलते हैं

आसमान से हीरे मोती का खजाना पाकर
अन्नपूर्णा माता भी मेहरबान हो जाती हैं
प्यार दुलार अपना लुटाती
दिल खोलकर
अन्न बरसाती हैं

पेड़-पौधें भी हरे पोशाकों में
खूब इठलाते हुए खड़े हैं
प्रकृति की मधुर मुस्कान देख
सारे फूल कलियां खिल गए हैं
नदियां,तलाब भी खुशी के गीत गा रहे हैं
आपकी महिमा अद्भुत निराली है
कृपा से भर जाती झोली खाली है

खूबसूरत एहसास
और सुकून बनके
रिमझिम बरसती
खुशी की फुहार बनके
आ गई बारिश
उमंग और त्योहार बनके।।
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2 महीने पहले

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