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आईने को खु़द से दूर ग़जल

                
                                                         
                            आईने को खु़द से दूर भगा रखा है
                                                                 
                            
जब से किताबों में दिल लगा रखा है
यूं तो सजने संवरने की शौक थी मेरी
इस शौक को भी किताबों में भरमा रखा है
दर्पण से मेरी कई कई दिनों तक मुलाकाते
नहीं होती किताबों ने मुझे अपने जिंदगी का
हिस्सा बना रखा है
यूं तो पढ़ने की शौक थी मेरी अब लिखना
भी इसमें शामिल हो गया है बिना लिखे
चैन आता नही मुझे लेखनी ने खुद का
आदी बना रखा है
यूं तो रातों को चैन से सो जाया करती थी
अब तो रातों को भी जगा रखा है
आईने को खु़द से दूर भगा रखा है
जब से किताबों में दिल लगा रखा है
 
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6 महीने पहले

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